Republic day speech in hindi-गणतंत्र दिवस पर भाषण-निबंध।

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आप सभी महोदय को गणतंत्र दिवस (Republic day) की हार्दिक शुभकामनाएं गणतंत्र दिवस को रिपब्लिक डे भी कहा जाता है रिपब्लिक डे एक राष्टीय त्यौहार  है ,यह हमारे देश के महत्वपूर्ण राष्टीय त्योहारों में से एक है।
Republic day speech in hindi-गणतंत्र दिवस पर भाषण-निबंध।
गणतंत्र दिवस मनाते तो सभी है पर इसके पीछे के कुछ ऐसे तथ्य है ,जिससे आप लोग अनिभिज्ञ होंगे।गणतंत्र दिवस के सुबह अवसर में गणतंत्र दिवस और संविधान से जुड़ी कुछ तथ्यों के बारे में बताने जा रहा हूँ , जिससे सुनकर आप को आनंद की अनुभूति होगी,साथ ही आपको अपने देश के संविधान के बारे में और गणतंत्र दिवस के बारे में जानकारी मिलेगी।

गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है:

गणतंत्र दिवस  (Republic day) को मनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है की,इस दिन हमारे देश में भारतीय संविधान लागू हुआ थासंविधान क्या है संविधान एक हस्त लिखित नियमावली का एक संग्रह है जो कई देशो के संविधानो का एक अनोखा संगम है।

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इस दिन भारतीय अधिनियम 1935 को हटाकर भारतीय संविधान लागू किया गया था ,इसी उपलक्ष में इस दिन राष्टीय त्यौहार के रूप में मनाया जाता है

भारतीय संविधान से जुड़ी कुछ  रोचक तथ्य:

1.हमारे देश का संविधान विश्व का सबसे वृहद् हस्त  लिखित  संविधान है 
2.डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर साहब को भारतीय संविधान को लिखने के लिए 2 साल 11 महीना 18 दिन  का अवधि लगा था और सबसे रोचक बात इसमें यह है की यह हाथ से लिखी गई है  
3.भारतीय संविधान 2 भाषाओ में लिखी गई है हिंदी और इंग्लिश  
4.संविधान में जो पंचवर्षीय योजना की अवधारणा ली गई है वो रूस से ली गई है 
 
5.देश के संविधान में सत्यमेव जयते महत्वपूर्ण वाक्य का उपयोग किया गया है,वह अथर्वेद के मुंडका उपनिषद  से लिया गया है   
6.भारत रत्न वाक्य मदन मोहन मालवीय जी के द्वारा दिया गया था 
7.तिरंगे का नमूना बनाने का गौरव मछली पटनम के पिंगली वेंकैया नामक किसान को मिला था
 

आशा करता हूँ की आपको गणतंत्र दिवस (Republic day) की ये जानकारी अच्छा लगा होगा इसी के साथ आपको एक बार फिर से गणतंत्र दिवस (Republic day) की हार्दिक शुभकामनाएं। भारत माता की जय


Republic day speech in hindi-गणतंत्र दिवस पर भाषण-निबंध।2Republic Day Essay In Hindi

चारो तरफ अंग्रेज अपना सत्ता जमाने के फेर में लगे थे और इधर हमारे देश के वीर सपूत भी पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे थे।  नरम दल और गरम दल दोनों के क्रन्तिकारी अपने-अपने समूहों के साथ अंग्रेजो का विरोध कर रहे थे पर ब्रिटिश गोवेर्मेंट नहीं चाह रही थी की भारत देश स्वतंत्र हो । 
अंग्रेजो की  राजनीति अब वीर क्रन्तिकारी समझ चुके थे,अब वो पीछे नहीं हटना चाहते थे इसी के परिणामस्वरूप 26 जनवरी 1929 के लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरु जी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पूर्णस्वराज्य की शपथ ली।
26 जनवरी 1929 के शपथ के बाद देश के सभी वीर योद्धा अपने अपने-अपने तरीके से  पूर्णस्वराज्य के सोच को मूर्तरूप देने में लग गए। 26 जनवरी 1929 का शपथ 15 अगस्त 1947 को पूरा हुआ देश के हर व्यक्ति को अपने जन्मभूमि में खुलकर जीने का अधिकार मिला और देश को अंग्रेजो के आतंक से मुक्ति मिली और देश में पूर्ण स्वतंत्रता का बिगुल बज उठा।
हम आजाद हो चुके थे ,पर नियम कायदे अभी भी अंग्रेजो के द्वारा बनाए गए नियम ही चल रहा था । अब देश के सामने यह चुनौती थी,अपना नियम देश में लाया जाए और अपना देश का नियम कानून चले इसी काम को पूर्ण करने के लिए डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर साहब को चुना गया और डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर साहब संविधान की संरचना करने में लग गए।

क्या खासियत है इस दिन की ?

2 साल 11 महीना 18 दिन  की अथक परिश्रम के परिणामस्वरूप भारतीय संविधान का निर्माण हुआ,26 जनवरी 1950 को  देश का संविधान लाया गया और  देश को  पूर्ण गणतंत्र देश घोषित किया गया।
गणतंत्र देश घोषित करने के लिए इस दिन को इसलिए चुना गया,क्योंकि इस दिन तक पहुंचने की शुरुआत 26 जनवरी 1929 को लाहौर अधिवेशन से हुई थी इसलिए 26 जनवरी के दिन को ही चुना गया।इसलिए 26 जनवरी को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है।

गणतन्त्र (गण+तंत्र) का अर्थ है देश के नागरिको के लिए,देश के नागरिको का शासन।इसीलिए इस दिन को गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।


गणतंत्र दिवस पर माखनलाल चतुर्वेदी जी का देशभक्ति कविता

प्यारे भारत देश
गगन-गगन तेरा यश फहरा
पवन-पवन तेरा बल गहरा
क्षिति-जल-नभ पर डाल हिंडोले
चरण-चरण संचरण सुनहरा

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ओ ऋषियों के त्वेष
प्यारे भारत देश।।

वेदों से बलिदानों तक जो होड़ लगी
प्रथम प्रभात किरण से हिम में जोत जागी
उतर पड़ी गंगा खेतों खलिहानों तक
मानो आँसू आये बलि-महमानों तक

सुख कर जग के क्लेश
प्यारे भारत देश।।

तेरे पर्वत शिखर कि नभ को भू के मौन इशारे
तेरे वन जग उठे पवन से हरित इरादे प्यारे!
राम-कृष्ण के लीलालय में उठे बुद्ध की वाणी
काबा से कैलाश तलक उमड़ी कविता कल्याणी
बातें करे दिनेश
प्यारे भारत देश।।

जपी-तपी, संन्यासी, कर्षक कृष्ण रंग में डूबे
हम सब एक, अनेक रूप में, क्या उभरे क्या ऊबे
सजग एशिया की सीमा में रहता केद नहीं
काले गोरे रंग-बिरंगे हममें भेद नहीं

श्रम के भाग्य निवेश
प्यारे भारत देश।।

वह बज उठी बासुँरी यमुना तट से धीरे-धीरे
उठ आई यह भरत-मेदिनी, शीतल मन्द समीरे
बोल रहा इतिहास, देश सोये रहस्य है खोल रहा
जय प्रयत्न, जिन पर आन्दोलित-जग हँस-हँस जय बोल रहा,

जय-जय अमित अशेष
प्यारे भारत देश।।


वीर क्रन्तिकारी अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ की रचना

कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएंगे,
आज़ाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे।

हटने के नहीं पीछे, डरकर कभी जुल्मों से,
तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे।

बेशस्त्र नहीं हैं हम, बल है हमें चरख़े का,
चरख़े से ज़मीं को हम, ता चर्ख़ गुंजा देंगे।

परवा नहीं कुछ दम की, ग़म की नहीं, मातम की,
है जान हथेली पर, एक दम में गंवा देंगे।

उफ़ तक भी जुबां से हम हरगिज़ न निकालेंगे,
तलवार उठाओ तुम, हम सर को झुका देंगे।

सीखा है नया हमने लड़ने का यह तरीका,
चलवाओ गन मशीनें, हम सीना अड़ा देंगे।

दिलवाओ हमें फांसी, ऐलान से कहते हैं,
ख़ूं से ही हम शहीदों के, फ़ौज बना देंगे।

मुसाफ़िर जो अंडमान के, तूने बनाए, ज़ालिम,
आज़ाद ही होने पर, हम उनको बुला लेंगे।

 

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Shashank Dwivedi

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