Navratri wishes & interesting facts

Navratri  की शुभकामनाएं और navratri से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य:

सबसे पहले तो navratri  की ढेर सारी शुभकामनाएं ,सभी को  पूरे वर्ष  भर इंतजार रहता है की कब navratri  कब आएगी और माता की आराधना कर मन आत्मा का शुद्धि करेंगे।सभी ओर आध्यात्मिक वातावरण रहता है मन प्रसन्नचित हो जाता है,कुछ लोग पूरे नौ दिन का उपवास भी करते है नवरात्री में पुरे नौ दिन नौ अलग-अलग देवियो की आराधना की जाती है चलिए जानते है की नवरात्री से सम्बंधित कुछ ख़ास तथ्यों के बारे में।

Navratri wishes & interesting facts

आगे बढ़ने से पहले एक छोटा सा सन्देश

नवरात्री में नौ दिनों के पूजा संकल्प में एक और संकल्प का समावेश जरुरी है,बेटी को दुनिया में आने दो आखिर बेटी भी माँ दुर्गा का अंश है ,आपकी पूजा आरती और सार्थक बन जाएगी अगर कन्या रक्षा में  योगदान दे फिर वास्तव में हम मातारानी के आशिर्वाद के निश्चित ही भागीदार है।

Navratri wishes1


कितने नवरात्री आते है पुरे वर्ष में

नवरात्री  हिन्दुओ के द्वारा मनाया जाने वाला धार्मिक त्यौहार है,एक नवरात्र चैत्र मास (मार्च अप्रैल) में आता है जिसको चैत्र  नवरात्र भी कहते है इस दिन हिन्दुओ का नववर्ष भी प्रारम्भ होता है, कुछ लोग इसे राम नवरात्र भी कहते है,क्योकि इस नवरात्र के नवमे दिन राम जी के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है ।

शारदीय और चैत्र नवरात्री के अलावा दो नवरात्री वर्ष में और आते है यह आषाढ़ (जून-जुलाई) और माघ (जनवरी-फरवरी) में आते है।

चौथा नवरात्री शारदीय नवरात्री मनाते है,यह आश्विन मास (सितम्बर-अक्टूबर) को मनाते है शारदीय नवरात्री पुरे भारत वर्ष में बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है और हरेक राज्य में एक अलग तरीके से मनाया जाता है।

इस नवरात्री की भव्यता कुछ अलग ही होती इन नौ दिनों में शक्ति की आराधना की जाती है ऐसी मान्यता है की इन नौ दिनों में मंत्रो की शक्ति का विशेष प्रभाव रहता है। माता रानी को मंत्रो के माध्यम से प्रसन्न कर बाधा से मुक्ति और सुख शांति को बढ़ाया जा सकता है।


नौ देवियो के नाम और व्याख्या

Navratri में नौ देवियो की आराधना की जाती है जिसको आप हम इस छोटे से मंत्र के माध्यम से समझ सकते है साथ ही इस मन्त्र में नौ देवियो के नामो का भी समावेश है चलिए जानते है कौन सा मंत्र है ये ।

प्रथम् शैल-पुत्री च, द्वितियं ब्रह्मचारिणि
तृतियं चंद्रघंटेति च चतुर्थ कूषमाण्डा
पंचम् स्कन्दमातेती, षष्टं कात्यानी च
सप्तं कालरात्रेति, अष्टं महागौरी च
नवमं सिद्धिदात्री।

इस मन्त्र में नौ देवियो का नाम इस प्रकार से है

शैल-पुत्री (शैल पुत्री पर्वतराज दक्ष की पुत्री को कहा जाता है )

इस जन्म में शैल पुत्री भगवान् भोलेनाथ से विवाह कर लेती है लेकिन राज दक्ष को को यह बात पसंद नहीं थी और एक बार यज्ञ करने के दौरान राजा दक्ष भगवान् भोलेनाथ को अपमान करने के उद्देश्य से उनको आमंत्रित नहीं करते और यह अपमान शैलपुत्री सह नहीं पाती और यज्ञ कुंड में ही समा जाती है और माता सती के नाम से प्रसिद्ध होती है ।

ब्रह्मचारिणि (शांति का रूप है माता का यह रूप )

जैसे नाम से स्पष्ट है की ब्रह्मचारिणी मतलब कठोर व्रत और उपासना करने वाली माता का यह रूप है इस जन्म में भगवान् भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या करना पड़ा था।

चंद्रघंटा (चंद्र और घंटा से सुसज्जित माता )

माता के इस रूप में माता रानी के सर चंद्र का निवास  है और हाथो में घंटा लिए हुए रहती है जिसकी वजह से इस रूप को चंद्रघंटा कहते है इस रूप में माता रानी के दस हाथ और तीन नेत्र है और सभी हाथ शस्त्र लिए हुए जो युद्ध के लिए तत्पर है ऐसा रूप है माता चंद्रघंटा का।

कूषमाण्डा (प्रसन्त्ता का रूप है माता का )

इस रूप में मातारानी ब्रह्माण्ड का निर्माता के रूप में जाने जाती ऐसी मान्यता है की माता की प्रकाश से ब्रह्माण्ड पैदा हुआ है।

स्कंदमाता (माँ का आशीर्वाद स्वरुप)

नवरात्री का पांचवे दिन माता स्कंदमाता की आराधना की जाती है,हिमालय पुत्री की रूप में शिवजी से विवाह होने के बाद पुत्र स्कंद का जन्म हुआ जिसकी वजह से स्कन्द माता कहलाती है आगे चलकर स्कन्द देवताओ के सेनापति बन गए।

कात्यानी

इस रूप के बारे में ऐसी मान्यता है की कता नामक व्यक्ति माता दुर्गा का कठोर आराधना करता है और माँ दुर्गा को प्रसन्न कर पुत्री के रूप में माँ दुर्गा को चाहता है जिसके परिणाम स्वरूप माता कात्यानी का जन्म होता है।

कालरात्रि

यह माता का भयंकर रूप है जो जिसमे मातारानी का बाल बिखेरे हुए रहता है, मुँह से आग के लपटे बाहर निकलती रहती है मृत शरीर उनका सवारी के रूप में है उन्हें “शुभ कुमारी” भी कहा जाता है जो अपने भक्तो का भला करती है।

महागौरी 

मातारानी का ये रूप पवित्रता का रूप है,माता महागौरी का यह रूप में वह एक गहरे समुद्र की भाति शांत और गंभीरता लिए हुए  है, एक बार माता गौरी धरा पर गिर गई, उनका तन मैला हो गया,शिवजी सफाई के लिए गंगाजल का उपयोग करते जिसके बाद माता रानी बिजली की तरह साफ़ हो गई और उनका नाम महागौरी पड़ गया।

सिद्धिदात्री

मातारानी का नौवे दिन सिद्धदात्री की पूजा की जाती है इस रूप में माता जी के पास आठ सिद्धियों से परिपूर्ण है जो इस प्रकार से है -अनिमा ,महिमा ,गरिमा ,लघिमा ,प्राप्ति ,प्राकाम्य ,लिषित्वा और वशित्व।  माता के इस रूप में अपार ज्ञान और सिद्धिया है।


नौ देवियो को प्रसन्न करने के नौ मंत्र

1. शैलपुत्री : ह्रीं शिवायै नम: 

2. ब्रह्मचारिणी : ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:

3. चन्द्रघंटा : ऐं श्रीं शक्तयै नम:

4. कूष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम:

5. स्कंदमाता : ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:

6. कात्यायनी : क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:

7. कालरात्रि : क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:

8. महागौरी : श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:

9. सिद्धिदात्री : ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:

Navratri में नौ दिन पूजा अगर इन मंत्रो के साथ किया जाए तो माता की असिम कृपा भक्तो को जरूर मिलती है।

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Shashank Kuldeep Dwivedi

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