Funky-Junky Story in Hindi

Funky-Junky Story in Hind

 

स्वागत है आप सभी का Hindi Tech Talk में आज ,मैं यहाँ आप लोग को Funky-Junky की कहानी बताऊंगा जिसके माध्यम से,आजकल सबसे बड़ी परेशानी अभिभावक और बच्चों के बीच होने जनरेशन गैप और इसकी वजह से पनपने वाली समस्याओं के बारे में चिंतन-मनन करेंगे,चलिये start करते है।

एक बड़ी सिटी थी जहाँ दो middle class फैमिली रहते थे,दोनो परिवारों में बड़ा सामंजस्य था इत्तफ़ाक़ की बात ये थे,की दोनों परिवार के मुखिया एक ही office में कार्यरत थे।दोनो की उम्र लगभग 27-28 थी ,government job होने की वजह से दोनों शाम को 5 बजे तक घर वापस आ जाते थे एक का नाम था महेश दूसरा का नाम था ईश्वरचंद।

महेश जो था रूढ़िवादी औऱ पुराने विचारधारा वाला आदमी था उसके जीवन का उद्देश्य था नौकरी करो शाम को घर आओ बीवी पर रौब जमाओ बस यही उसकी life थी, ठीक इसके विपरीत ईश्वरचंद का स्वभाव था,वो शाम को duty से वापस आने के बाद buisnes के बारे में जानकारी इक्कठा करता और जितनी उसकी सामर्थ्य था छोटे-छोटे प्रयास भी करता और उसकी बीवी भी इस चीज में पूरा साथ देती।
ईश्वरचंद की बीवी अचार-पापड़ बनाती और तैयार होने पे ईश्वरचंद सुविधानुसार उसको मार्केट में छोटे-छोटे दुकानो में सप्लाई कर आता था।इससे उनकी कुछ एक्स्ट्रा income भी हो जाया करता था,जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होते जा रही थी।

 

समय जाते गया और महेश और ईश्वरचंद के यहाँ संतान प्राप्ति हुई महेश ने बेटे का नाम रखा junky और ईश्वरचंद ने बेटे का नाम रखा funky दोनो बच्चे बड़े होते गये और दोनों में बहुत अच्छी मित्रता भी funky-junky साथ मे school जाते और खूब मजा करते।महेश अपने बेटे को पढ़ाई के लिये खूब जोर देता और डाँटता की पढ़ाई करो तब कही जाकर गवर्मेंट जॉब मिलेगी और life सही track पर जाएगी, इसके ठीक विपरीत ईश्वरचंद अपने बेटे funky को पढ़ाई के लिये प्रोत्साहित भी करता और मार्केट, स्टॉक्स, बिज़नेस के बारे भी थोड़ी थोड़ी जानकारी देते रहता।समय का पहिया घूमा और funky-junky दोनो का इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन हुआ दोनो पढ़ाई में तेज थे और अच्छे नंबरों से पास भी हुआ करते थे।

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Funky-Junky जब भी छुट्टियों में घर जाते junky के पिता junky को प्रेशर देते की पढ़ाई करो घूमो मत इससे junky परेशान रहता और छुट्टियों के खत्म होने के पहले ही होस्टल लौट जाता था, जबकि funky के पिता ईश्वरचंद बेटे को अपने एडिशनल बिज़नेस अचार-पापड़ के बारे में समझाता और local मार्केट में भेजता भी था और वो निसंकोच जाता भी था और छोटे-छोटे deal भी करता वो ये काम अच्छे से करता और अपना पढ़ाई भी करता।
कुछ समय बाद funky-junky इंजीनियरिंग के last ईयर में पहुँच जाते है और कई MNC कंपनी के campus आ रहे होते हैं, funky का अच्छे MNC कंपनी में job मिल जाता है और exam के बाद वो join भी कर लेता है।पर junky का किसी कैंपस में selection नहीं हो पाता है और exam के बाद घर लौट जाता है उधर junky के पिता महेश junky को व्यंग्य ताने मारते हैं, कि वो देखो funky का job लग गया और इतने ही कम उम्र में वो अच्छी सैलरी उठा रहा हैं, इससे junky में क्रोध और frustration भरते जा रहा कुछ समय बाद ऐसा हुआ कि junky अपने पिता महेश से बात करना ही बंद कर दिया।

एक बार funky अपने छुट्टियों में घर आता है और अपने पिताजी से अपने मन की बात करता है कि पिताजी मैं जॉब नहीं करना चाहता, मैं अपना खुद का बिज़नेस करना चाहता हूँ, ये सुनकर ईश्वरचंद अपने बेटे funky से बोलते है कि कौन सा बिज़नेस करना है funky संकोच करते हुए बोलता है पिताजी आप बुरा थोड़े ही मानेंगे ईश्वरचन्द्र बोलता है निसंकोच बोलो बेटा,funky बोलता है मैं आपके side buisness अचार -पापड़ के बिज़नेस को अपना main बिज़नेस बनाना चाह रहा हूँ, ये सुनते ही ईश्वरचंद बोलते है क्यों नहीं करो बिल्कुल करो मैं तुम्हारे साथ हूँ, ये सुनते ही funky के आँखों मे एक अजीब सी खुशि ओर आँखों मे चमक दिखाई देती है,और funky अपना जॉब छोड़कर अचार-पापड़ के बिज़नेस में पूरे जोश के साथ लग जाता है और धीरे-धीरे funky का बिज़नेस बढ़ने लगता है।

इसके ठीक विपरीत महेश का बेटा junky depression में चले जाता है और किसी से कुछ बातचित नही करता है,एक दिन junky के पिताजी महेश funky के पिता ईश्वरचंद से बोलते है कि ईश्वर तुम अपने बेटे को इतना पढ़ाई-लिखाई करवाएं है और उसे buisness करवा रहे हो तब ईश्वरचंद बोलते है देखिये महेश अगर मैं funky ऊपर अपनी इच्छा का दबाव दूँगा तो उसके मन मे एक कसक और अनिच्छा की भावना पनपेगी जिससे वो खुश नही रह पाएगा और काम मे मन नहीं लगेगा और संतुष्ट नहीं रहेगा देखिये आज funky खुश भी है और संतुष्ट भी है मैं नहीं चाहता कि वो अफ़सोस में जिंदगी बिताये, ये सुनते ही महेश के आँखों मे आँसू आ गए और महेश ईश्वरचंद्र से कहते कि ईश्वर तुम अपने बेटे को कितना समझते हो और एक मैं हु जो अपने बेटे पर अपनी इच्छा थोपते रहा जिसके चलते आज मेरा बेटा मेरे से दूर हो गया है, तब ईश्वरचंद बोलते है देखो भाई महेश जीवन किसी फार्मूला में नहीं चलती जीवन चलती है खुशि और संतुष्टि से आप अपने बेटे से कभी भी मन की बात जानने की कोशिश ही नहीं कि वो  क्या चाहता है , एक बार आप अपने बेटे को उसकी  नजर से समझने की कोशिश तो करिये आपका बेटा फिर से मुस्कुरा उठेगा।

ईश्वरचंद घर जाते ही अपने बेटे junky से कहते है बेटा junky तुम खुल के बताओ कि तुम क्या करना चाहते हो अपने कैरियर के विषय मे junky को बड़ा आश्यर्य होता है कि आज पिताजी कैसे  इतने अच्छे से बात कर रहे junky के आँखों मे आंसू आ जाता है और अपने पिताजी के गले लग जाता है तब महेश अपने बेटे से बोलते बताओ अपने मन की बात junky बोलता है,पिताजी मैं tea instaal लगाना चाहता हूँ थोड़ा सोचकर महेश बोलते है ठीक है।junky पूरे जोश के साथ अपना tea install का buisness में involve हो जाता है और देखते ही देखते junky एक बड़ा सा रेस्टोरेंट तक खोल लेता है जहाँ different variety का tea और cofee की सुविधा होती है और महीने में 50000-1lakh तक कमाने लगता है।उधर funky भी अपने अचार-पापड़ के बिज़नेस को इतना आगे बढ़ा लेता है कि दूसरे state में भी supply करने लग जाता है।
Funky-junky दोनो अपने अपने बिज़नेस को बहुत अच्छे से संभाल लेते हैं।

 

Moral-इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है कि अभिभावक अपने बच्चों को भविष्य के लिये तैयार करें पर दबाव न दे, ऐसा न हो कि आपका बच्चा भविष्य तो न बनाये पाए और आपसे और अपने आप से दूर न हो जाय।याद रखिये आपकी असली सम्पति आपके अपनी संतान है थोड़ा उनपे यकीन करके देखिए हरेक बच्चे में कुछ खासियत होती है,मौका दीजिये उन्हें उड़ने दीजिये अपने नजरो में उठने दीजिये।इंसान की जरूरत कभी खत्म नहीं होती लेकिन संतुष्टि की एक पतली सी परत और मुस्कान की एक लहर को आप भी पहचान सकते है बस जरूरत है”अपने औऱ अपनो को समझने की”


       ध्यान रखिये परखते रखिये कही आप भी महेश थोड़े ही बन रहे हैं और अपने संतान को junky जैसे मुसीबत में थोड़े ही डाल रहे है।


 धन्यवाद मेरी इस कहानी को पढ़ने के लिए आशा करता हूं आपको पसंद आया होगा,पसंद आये तो like और share कीजिये।

 

आपका

शशांक द्विवेदी

      www.hinditechtalk.com

 

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