अपने Goals में Focus करिये।

अपने  Goals  में  Focus  करिये

www.hinditechtalk.com में स्वागत हैं, आखिर वजह क्या हैं कि   बहुत से लोग अपने goal में focus नहीं कर पाते।और सारा blame अपने आसपास के किसी विपरीत परिस्थितियों या किसी व्यक्ति को ठहराते हैं,ये कहाँ तक सही हैं।अपने goal में focus नहीं कर पाते जिसकी वजह से   बहुत से लोग हार  मानकर अपना goal change कर देते हैं या गलत रास्ता अपना लेते हैं।विपरीत       परिस्थितियों से  जूझते हुए  धर्म के विजय प्राप्ति के लिये कैसे श्री कृष्ण ने अपने goal को प्राप्त करने के लिये focus किया,वहीं इसके विपरीत कर्ण ने अपने goal को प्राप्त नहीं कर पाया क्योंकि उसने परिस्थितियों को सामने घुटना टेक दिया।

बात उस समय की जब महाभारत युद्ध चल रहा था और श्री कृष्ण और कर्ण के बीच जो वार्ता अलाप हुआ उसका कुछ अंश नीचे जिससे हम समझने      का कोशिश करेंगे। 

कैसे हम अपने goal के लिये focus करें।

 

महाभारत में कर्ण ने भगवान कृष्ण से पूछा“मेरी मां ने मुझे जन्म दिया था। क्या यह मेरी गलती है कि मैं एक अवैध बच्चा पैदा हुआ था?
मुझे द्रोणाचार्य से शिक्षा नहीं मिली क्योंकि मुझे क्षत्रिय नहीं माना गया था।
परशुराम ने मुझे सिखाया लेकिन फिर मुझे सबकुछ भूलने का अभिशाप दिया जब उन्हें पता चला कि मैं कुंती का पुत्र क्षत्रिय का था।
एक गाय को मेरे तीर से गलती से मारा गया था और उसके मालिक ने मुझे मेरी कोई गलती के लिए शाप दिया था।
मैं द्रौपदी के स्वयंवर में अपमानित था।
यहां तक ​​कि कुंती ने अंततः मुझे अपने अन्य बेटों को बचाने के लिए सच्चाई भी बताया।
जो भी मुझे मिला वह दुर्योधन के दान के माध्यम से था।
तो मैं उसकी तरफ लेने में गलत कैसे हूं ??? “
भगवान कृष्ण ने जवाब दिया, “कर्ण, मेरा जन्म जेल में हुआ था।
मेरे जन्म से पहले भी मृत्यु मेरे लिए इंतज़ार कर रही थी।
जिस रात मैं पैदा हुआ था, मैं अपने जन्म माता-पिता से अलग हो गया था।
अपने Goals में Focus करिये।
बचपन से, आप तलवारों, रथों, घोड़ों, धनुष और तीरों के शोर को सुनकर बड़े हुए। मुझे केवल गाय गौशाला, गोबर, और मेरा पूरा जीवन संघर्ष और अपने माँ बाप के वियोग में बिता।
कोई सेना नहीं, कोई शिक्षा नहीं। मैं लोगों को यह कह सकता था कि मैं उनकी सभी समस्याओं का कारण हूं।
जब आपके सभी शिक्षकों द्वारा आपके बहादुरी के लिए आपकी सराहना की जा रही थी तो मुझे कोई शिक्षा भी नहीं मिली थी। मैं 16 साल की उम्र में ऋषि संदीपनी के गुरुुकुला में शामिल हो गया!
आप अपनी पसंद की एक लड़की से विवाहित हैं। मुझे वह लड़की नहीं मिली जो मुझे पसंद थी और बल्कि उन लोगों से शादी करना समाप्त कर दिया जो मुझे या राक्षसों से बचाया था।
मुझे अपने पूरे समुदाय को यमुना के तट से जरासंध से बचाने के लिए पूरे समुदाय को दूर ले जाना पड़ा। मुझे डरपोक कहा गया।
यदि दुर्योधन युद्ध जीतता है तो आपको बहुत अधिक क्रेडिट मिलेगा। धर्मराज ने युद्ध जीतने पर मुझे क्या मिलेगा? युद्ध और सभी संबंधित समस्याओं के लिए केवल दोष।
कर्ण, एक बात याद रखें। हर किसी के सामने जीवन में चुनौतियां होती हैं।
जीवन किसी भी तरह से आसान नहीं है !!!

 

 

Goals को प्राप्त करने के लिए कैसे परिस्थतियो के प्रति प्रतिक्रिया दे और Focus करे हमारे ऊपर है

 

 

 

हमारे साथ कितना गलत हुआ और किसकी वजह से हुआ कोई फर्क नहीं पड़ता,कितना अनुचितता मिली, कितनी बार हम अपमानित हुए, कितनी बार हम गिरे, महत्वपूर्ण बात यह है कि उस समय आप कैसे प्रतिक्रिया करते हैं।
श्री कृष्ण भी अपने goal(धर्म) में focus न करके दुर्योधन का युद्ध में साथ देकर हस्तिनापुर में के राज पाठ में अच्छा स्थान पा सकते पर उन्होंने ये बिल्कुल नहीं किया और अपने goal पर 100% focus किया।जिसके चलते धर्म की विजय हुई और अधर्म का नाश हुआ।
वहीं कर्ण ने अपने goal (धर्म) पे focus नहीं किया और अधर्म का साथ देकर अंत को प्राप्त किया।कर्ण ने जितना      भी  कष्ट झेला रहा होगा, पर इतिहास आज भी कर्ण को अधर्म का साथ देने के वजह से कोसता है।
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याद रखिये कि अगर आपको अपने जीवन में      कुछ बहुत बड़ा उपलब्धि प्राप्त करना है तो अर्जुन के तरह आप भी केवल मछली के आंख(goal) पर focus कीजिये।अगर आप हमेशा किसी व्यक्ति और परिस्थिति को blame करते रहेंगे तो कभी goal को प्राप्त नहीं कर पाएंगे,  आप कहीं भी देख लीजिए जो बड़े-बड़े उपलब्धि हुआ वो इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने goal पे focus किया।
         पसंद आये तो share कीजिये।
         आपका मित्र
        शशांक कुलदीप द्विवेदी

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