essay on diwali in hindi

Diwali पर निबंध

Diwali हमारे देश में मनाया जाने वाला ऐसा त्यौहार है,जिसका नाम लेते ही हमारे मन में एक उमंग का संचार हो जाता और मन में एक ऐसा प्रतिबिम्ब बन जाता है कि चारो तरफ दिये की रोशनी,फटाखे, नए कपड़े,लाइट की चकाचौँध,उमंग आये भी तो  क्यों न आये,क्योंकि हम पूरे वर्ष भर इस त्यौहार का इंतजार करते है।दिवाली को दीपावली भी कहा जाता है जो कि संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना  ‘दीप’ अर्थात ‘दिया’ व ‘आवली’ अर्थात ‘पंक्ति ‘ जिसका मतलब है दियो की पंक्तिया।चलिए जानते है diwali त्यौहार को मनाने का इतिहास क्या है?

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दिवाली त्यौहार का इतिहास

हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्री दशरथ पुत्र राम चौदह वर्षो का वनवास ख़त्म कर और लंकापति रावण का वध करके अपने राज्य अयोध्या वापस आये थे,श्री राम की वापसी की ख़ुशी में अयोध्या वासी पूरे अयोध्या को मिट्टी के दिये जलाकर रोशन कर दिए थे और अमावस्या होने के बाद भी पूर्णिमा की रात लग रही थी ,ये परम्परा आज भी चली आ रही है और पूरे देश में दिवाली मनाया जाता है।

दिवाली पर्व कितने दिनों तक मनाया जाता है

diwali  कुल मिलाकर पांच दिनों का त्यौहार होता है जिसका प्रारम्भ  धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज में समापन होता है हर एक दिन के पीछे कुछ न कुछ इतिहास  है पांच दिनों के त्यौहार को क्रमशः इस प्रकार बांटा गया है।

धनतेरस

कार्तिक मास के त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था भगवान् धन्वंतरि देवताओ के चिकित्सक भी थे। इस दिन भगवान् धन्वंतरि और कुबेर जी  की  पूजा अराधाना की जाती है। कुबेर महाराज धन के देवता है ऐसी मान्यता है की इस तिथि में सोना,चाँदी,हीरे-मोती और किसी भी तरह का सामग्री खरीदने के लिए दिन उपयुक्त होता है,इस दिन को धन त्रयोदशी भी कहा जाता है।

नरक चतुर्दशी

कार्तिक माह के चतुर्दशी तिथि  को नरक चतुर्दशी मनाया जाता है,इस दिन  भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध  किया था।ऐसी धारणा है इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में तेल लगाकर और चिचड़ी की पत्ती पानी में डालकर स्नान करने से सभी पापो से मुक्ति मिलती है और नरक नहीं जाना पड़ता। इस दिन शाम के समय हाथो से मिट्टी के दिये बनाकर यमराज को दीप दान किया जाता है, नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहा जाता है।

लक्ष्मी पूजा (बड़ी दिवाली)

कार्तिक मॉस के अमावस्या को लक्ष्मी जी की पूजा आराधना की जाती है,पुराणों में ऐसा लिखा हुआ है की इस दिन माता लक्ष्मी का जन्म हुआ था और इसी दिन ही माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप चुनकर उनसे विवाह किया था। इस दिन माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए घर के बाहर रंगोलिया बनाई जाती है,साथ ही केला के पत्तो और आम के पत्तो से तोरण बनाकर घर के मुख्य द्वार पर लगाया जाता साथ ही दिए भी जलाये जाते है इस दिन माता लक्ष्मी,भगवान विष्णु और गणेश जी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

गोवर्धन पूजा (अन्नकूट )

यह diwali त्यौहार का चौथा दिन होता है इस दिन को अन्नकूट भी कहा जाता है पुराणों में वर्णन है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियो को बचाया था,कहा जाता है की भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपने कनिष्ठिका ऊँगली से उठाकर सारे ब्रजवासी को शरण दी थी और इंद्र देव का अहंकार चूर-चूर कर दिया था। तब से इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा जाती है गोवर्धन पर्वत के प्रतीक स्वरुप गाये के गोबर से गोवर्धन पर्वत और श्री कृष्ण की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की परम्परा चली आ रही है।

भाई दूज (यम द्वितीय)

भाई  दूज लक्ष्मी पूजा के दो दिन बाद मनाया जाता है इस दिन को भाई बहन का भी त्यौहार बोला जाता है,इस दिन भाई बहन के घर जाकर तिलक लगवाकर बहन को सम्मान के साथ  अपनी श्रद्धा से उपहार देता है।

इस प्रकार दिवाली का पांच दिनों का त्यौहार संपन्न होता है इन पांच दिनों में हम अपने साल भर के सभी  कष्टों और दुखो को भूलकर diwali त्यौहार मनाते है जिससे हमारा  तन-मन आनन्दित हो जाता  है।

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यह एक त्यौहार ही नहीं बल्कि क्षमा याचना का भी त्यौहार है कुछ अपनी गलती और कुछ अपनों की गलतियों को भूलकर आगे बढ़ने का त्यौहार है, इसी के साथ आप सभी को दिवाली की ढेरो शुभकामनाएं।


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Shashank Kuldeep Dwivedi

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