Engineer Ki Life

Engineer Ki Life

आज हम बात करेंगे कि Engineer Ki Life के विषय में जो हर 10 में से 6 घर मे ऐसी कहानी देखने सुनने और अनुभव करने को मिल जायगी और आपसे निवेदन करता हूं, की इस कहानी को आप अपने करीबी मित्रगण को जरूर share करे हो सकता है कोई व्यक्ति ये story पढ़कर उसको जीने की राह मिल जाए , चलिये प्रारंभ करते है।

ये कहानी एक बच्चे के जीवन ऊपर लिखी गई हैं। माधवपुर कस्बा था जहाँ एक पिताम्बर दास नाम के एक व्यक्ति थे जो एक सरकारी मुलाजिम थे और उनकी धर्मपत्नी एक गृहणी,घर मे में पिताम्बर और उनकी धर्मपत्नी के अलावा पिताम्बर दास के माँ, बाप भी घर में थे बड़ा हँसता खेलता परिवार था,कुछ समय के बाद पिताम्बर दास के यहाँ एक बालक का जन्म होता है,चारो तरफ खुशि का माहौल होता है मिठाइयां बांटी जाती है खुशियां मनाई जाती है।

समय जाते गया पिताम्बर दास का पुत्र बड़ा होने लगता है मैं आपकों बता दू बालक का नाम पुरु रखा गया ,पुरु बड़ा होते गया और वो  class 12th me पहुँच जाता है 12th पहुँचते ही हरेक माँ-बाप की तरह पिताम्बर दास और उनकी धरपत्नी के मन मे पुरु को लेकर नाना प्रकार के सपने सजाने लगे।12th पास होते ही पिताम्बर के मन एक बात सोचे जाए कि पुरु कैसे पढ़ाया जाए उसे कौन से filed में पढ़ाई करवाया जाए कि उसकी life आसानी से चल पड़े,12th के result आते ही पिताम्बर पुरु को engineer बनाने के उद्देश्य से उसे coaching के लिये भेज देता है,जहाँ पुरु कड़ी मेहनत करके पुरु एक

अच्छे engineering कॉलेज में admission लेता है और वो माधवपुर से इंदौर शिफ्ट हो जाता है,इस समय पिताम्बर और उसकी धर्मपत्नी थोड़े दुखी होते हैं कि बेटा अकेले कैसे रहेगा ये सोचकर पुरु भी दुखी रहता है,पर इंदौर के enginnering college में वहाँ नए दोस्त मिल जाते है और उसकी यहाँ से Engineering Life start होता है चलिये आते है पुरु के साथ engineering ki life के हरेक पहलु के बारे में जानेंगे कि वो कौन सी कठनाइयों औऱ जद्दोजहद को झेलते हुए अपनी life जीता है।engineer life ki पूरी journey को short में समझने की कोशिश करेंगे।

पुरु के engineer life की शुरुआत होती हैं, उसके हॉस्टल से जहाँ उसके दो दोस्त बन जाते हैं, अमित औऱ नमन अमित भी एक छोटे क़स्बे से रहता हैं औऱ नमन भी तीनो की दोस्ती की शुरुवात ऐसे होती है कि तीनों hostel में एक ही room में रहते और साथ-साथ class attend करतें है।आज उनके class का पहला दिन था दिल औऱ दिमाग मे कुछ उत्साह तो कुछ घबराहट थीं,तीनो दोस्त जैसे ही college के gate में पहुँचते हैं देखते हैं कि बहुत से seniors बैठे हुए ,उनको देखते ही तीनो की घबराहट बढ़ जाती वो सारे seneiors को good morning की जगह good evening बोल जाते है।पुरु को एक senior पकड़ लेता हैं, क्यों तेरे को morning और evening में फर्क समझ नहीं आता idiot, ये सुनते ही पुरु के चेहरे का रंग उड़ जाता है ये अमित और नमन भी डर जाते है seneiors बोलते हैं जाओ क्लास attend करो। class पहुँचते ही वहाँ class mam बोलती हैं क्यों late हुए डरते-डरते तीनो बोलते वो क्या हैं mam पहले खाने में late फिर gate पे seneiors gate पे रोक लिए, mam बोलती हैं excuse मत दो, ऐसे ही engineer बनोगे ऐसे ही पढ़ाई करोगे तीनो बोलते हैं sorry mam अब से late नहीं होगा।

Class खत्म होते ही तीनो अपने hostel चले जाते हैं, वहाँ dinner खत्म होते ही seneiors का फरमान आ जाता हैं कि आज रात कोई नहीं सोएगा आज super seneiors सभी juniors से मिलेंगे और college के तौर तरीके सिखाएंगे।सारे juniors और पुरु के दोनों दोस्त भी बताए गये hostel meeting point पे पहुँच जाते हैं, वहाँ सुबह के 4 बजे तक meeting होता हैं, juniors को तौर तरीके समझाया जाता है।पुरु औऱ  पुरु के दोस्त अमित और नमन थक कर सो जाते है जब आँख खुलती है तो time सुबह के 10 बजे हुए रहता हैं।तीनो दौड़ते भागते college पहुँचते हैं वहाँ फिर class mam का डाट सुनने को मिलता आज फिर late पुरु बोलता है वो क्या है night में होस्टल में ,,,,,,mam पूरा बात नही सुनती है और डॉट देती फिर excuse daily excuse ऐसे ही बनोगे engineer ,पुरु ओर उसके दोस्त बोलते हैं sorry mam, mam बोलती है चलो class attend करो।

समय जाते जाता है और तीनों का 1st semester खत्म करके 2nd semester में पहुच जाते है,second semester में नमन का back लग जाता हैं वो depression में चला जाता है लेकिन अपने पुरु और अमित के मदद से वो depression से बाहर आ जाता हैं, एक बात बताऊ दोस्तों engineering life के दोस्त बहुत ही खास होते हैं, और पुरी life साथ निभाते हैं।समय जाते जाता है तीनो 2nd semester से last semester में पहुँच जाते हैं अब start होता है campus के दौर का पुरु का एक core company में selection हो जाता है और अमित, नमन का it company में ।यहाँ से तीनों का professional career शुरू हो जाता अमित नमन एक बड़ी metro city shift हो जाते हैं और पुरु जहाँ join करता हैं वो remote location रहता हैं, तीनो दोस्त बड़े खुश होते है कि अब तो पैसे कमाएंगे और खूब मस्ती करेंगे जब छुट्टियों में मिलेंगे,लेकिन वो कहते है न दूर के ढोल सुहाने होते है वो बात पुरु और पुरु के दोस्तो को अपने-अपने filed में जाने के बाद समझ आया।

पुरु को  एक power project का site मिल जाता हैं जहाँ duty hour 8am से night 9.30pm तक रहता, moring पहुँचते ही contractor ko lineup, meeting,engineering department से dicussion सुबह से रात कब होती थी पुरु को पता ही नहीं चलता था।इसके चलते वो अपने दोस्त अमित और नमन को फ़ोन ही कर पाता था न ही अपने माँ बाप को ,पिताम्बर और उसकी धर्मपत्नी बड़े ही खुश रहते की बेटा  engineer बन गया है उन्हें क्या पता था engineer ki life कितना संघर्षपूर्ण होता है,इसको वो ही समझता है जो उस काम को समझता हो या उस filed से जुड़ा हुआ हो,पुरु सोचता था क्या मैं इसी के लिए पढ़ाई किया था और ये है engineer ki life सुबह 8am से 9.30pm की duty न खाने का time न सोने का न दोस्तो से मिलने का time न घर जाने का time न माँ बाप से मिलने का वक्त बस वो हर समय मन ही मन मे सोचते रहता पर अपनी व्यथा किसी से बोल नही पाता था,क्योंकि पुरु के मन ये ख्याल आता था कि मेरे माँ बाप ने बड़ी उम्मीद से मुझे पढ़ाया है मैं कैसे बोलूं की मेरी ये engineer ki life कैसी मैं कैसे बोलूं की ये life कितना frustration से भरा पड़ा है daily वो boss की झिकझिक daily labour, contractors से बहस सुबह से शाम project का hectic schedule में काम करना उसके बाद दोस्तो और family के call आने पर ये बोलना की सब मजे में, ये engineer ki life हैं।

समय जाते गया पुरु का power project खत्म होकर अब production में आ गया अब पुरु की उम्र भी शादी लायक हो गई पुरु के माँ बाप बहुत ही खुश थे पुरु की जल्द ही बहुत संस्कारवान लड़की से शादी भी हो गई,अब पुरु भी खुश था चलो अब तो power project भी खत्म हो गया अब तो life कुछ अच्छी हो जाएगी उसे क्या पता था कि project के बाद plant work culture change हो जाता है।

शादी के बाद जैसे ही पुरु वापस अपने professional life में वापस लौटता है,उसको शिफ्ट duty में डाल दिया जाता है,जो इस filed से संबध रखते हैं उनको पता होगा कि shift duty क्या हैं लेकिन जिनको नहीं पता उनको समझता हूं shift duty मतलब सप्ताह में आप 2night shift मतलब 10pm से 6am तक,2 दिन दोपहर 2pm से 10pm,2 दिन सुबह 4am से 6am।पुरु के लिये shift duty मतलब पहाड़ तोड़ने वाला काम लगता था।

उसको दिन और रात समझ नहीं आ रहा था कि दिन कब होती हैं, और कब रात बस duty किये जा रहा था।पिताम्बर उधर अपने माधवपुर में बहुत खुश था  कि बेटे का शादी भी हो गया चलो जीवन की ये जिम्मेदारी भी पूर्ण हुई करके,लेकिन पुरु को समझ नहीं आ रहा था कि ये कौन सी life हैं और कैसे इस engineer ki life को जिये ,उसके पास अपने बीवी और माँ बाप के लिए भी समय नही था, सालो साल निकल जाते थे उसे अपने दोस्तों से मिले अमित और नमन से मिले वो सब सोचते कि पुरु बहुत अच्छी life जी रहा है औऱ खूब पैसे कमा रहा है पर ऐसा बिल्कुल नहीं था,वो जानता थी कि वो

कौन सी life जी रहा ये है engineer ki life

 

कभी भी plant से call आने पे पुरु को problem solve करने जाना ही पड़ता था भले ही इधर खुद के problem solve करने का समय हो या न हो पर निर्जीव machine का problem solve करना जरूरी लगता था ये है engineer की life।

           भले ही घर पे बीवी, बच्चे, माँ बाप बीमार हो उनके इलाज के लिए time हो या न हो पर plant में मशीनों के बीमारी के लिए जरूर time हैं ये है engineer ki life।fever से body का temperature बढ़ रहा हो उसकी कोई परवाह नहीं पर plant में motor का temperature check और control करना नहीं भूलता ये है engineer ki life।दोस्तो,भाई, बहन से बात करने का समय हो या न हो पर plant के हरेक call का response देना नहीं भूलता चाहे रात के 3 ही क्यों न बजे हो ये है engineer की life

घर मे बहन के सगाई की तैयारी चल रही हो और घर से call आने पर भाई बोले सगाई में तो नहीं आ पाउँगा छुट्टी की दिक्कत है शादी में जरूर आऊंगा बोले ये है engineer ki life।घर मे electricity का bill paid करना भूलना हैं तो भूल जाए पर plant का data ज़ुबान पर ऐसे याद है जैसे मंत्र ये है engineer की life

पुरु के दिमाग मे ऊपर की सारी बाते गूंजते रहती थी पर बोल नही पाता ऐसे सोचते सोचते पुरु का उम्र निकलते गया और आज उसकी उम्र 56 हो चली अब भी पुरु सोच रहा हैं काश मैं उस समय जब  पहली बार ये अभास हुआ कि ये engineer ki life में duty से ज्यादा समझौता करना पड़ता हैं,काश उस समय मैं अपने दिमाग के बजाय दिल की सुनता और जो पसंद था जिसमे interest था वो काम करता तो कम से कम मेरी life में ये काश शब्द का जगह नही होता।

अपनी दिमाग को दौड़ाते रहिये कहीं आपके घर मे तो कोई पुरु थोड़े ही है और कहीं वो बेजुबान होकर ऐसे ही engineer ki life थोड़े ही जिये जा रहा है।

Moral
अपने बच्चों को दुनिया के भीड़ में भेड़ चाल चलने पे मजबूर मत करिये नहीं तो पुरु की भांति वो भी पूरी life अफसोस में न गुजार दे,एक ओहदे की खातिर अपने बच्चों को अफसोस से भरी life गुजारने में मजबूर मत करिये।
               पसंद आये तो like और share कीजिये।कुछ सुझाव हो तो दीजिये या कुछ motivational discussion topic हो तो बताइए मैं आपको story के माध्यम से solution बताने की कोशिश करूँगा
                                                                                                                      आपका मित्र
                                                                                                             शशांक कुलदीप द्विवेदी
                                                                                                           www.hinditechtalk.com

 

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *