मेमसाब की दिवाली

दिवाली पर प्रेरक कहानी।

मिना कब से बेल बज रही है कान में क्या गुब्बारे भरे है ,सुनाई नहीं दे रहा है ऐसा आवाज सुनते ही मिना दौड़े-दौड़े दरवाजा की तरफ भागी और झट से दरवाजा खोली सामने Courier boy, ढेर सारे सामान लिए हुए खड़ा था मिना चिड़चिड़ाहट भरी आवाज में बोल उठी भैय्या थोड़ा रुक नहीं सकते कितनी जल्दी-जल्दी बेल बजाए जा रहे हो।

Courier boy बोला दीदी दिवाली टाइम है बहुत से सामान डिलीवर करने जाना है इसलिए हड़बड़ी है मिना झुंझलाहट के साथ बोली ठीक है ठीक है सामान दो अब जल्दी मुझे भी बहुत काम है हम गरीबो का क्या हमारी क्या दिवाली हम तो बस काम के लिए दुनिया में आये है ऐसा कहते-कहते सामान लेकर जोर से दरवाजा बंद कर अंदर आ जाती है।

अंदर आते ही मिना बोलती है मेमसाब सामान मैंने ले लिया है टेबल पर रखा है आप देख लिजिए मेमसाब बोलती है ठीक है ठीक मैं देख लुंगी तू अपना काम कर अदिति बेबी आने वाली होगी तू लंच का तैयारी (अदिति मेमसाब की बेटी क्लास 1 में है) मिना बोलती है जी मेमसाब मैं लंच तैयार करती हूँ,

मेमसाब की दिवाली

ठीक दोपहर के 1 बजे रहे होंगे डोर बेल बजती है मिना दौड़े-दौड़े दरवाजा के तरफ भागती है सामने अदिति बेबी खड़ी रहती है अदिति बेबी मिना को देखते ही मिना से लिपट जाती है और बोलती है मिना दीदी आज क्या बनाई हो खाने में ,अब मिना का मिजाज कुछ ठीक था मिना बोलती है बेबी आज आपका favorite बैगन का भरता बनाया है। आपको पसंद है न, बेबी बोलती है हाँ दीदी मुझे पसंद है ,बेबी हाथ मुँह धोकर आती है मिना बेबी को खाना खिलाकर दूसरे काम में लग जाती है।

शाम के कुछ 5.30 बजे रहे होंगे मिना बोलती है मेमसाब आज छोटी दिवाली है,थोड़े जल्दी घर चले जाऊ क्या यह सुनते ही मेमसाब बोलने लगती है बस तुमको तो बहाना चाहिए छुट्टी का। .मिना बोलती नहीं मेमसाब ऐसी कोई बात नहीं है ,मैं तो बस ऐसे ही बोली इस समय मिना का आवाज थोड़ा भर आया था।

शाम करीबन 7 बजे  रहे  होंगे डोर बेल एक बार भी से बजती है इस बार कोई और नहीं रोहन था (रोहन घर का मालिक जो एक बैंकर है ) रोहन को देखते ही अदिति बेबी दौड़ते आती है और रोहन से लिपट जाती है पापा आज छोटी दिवाली है मेरे फटाके कहा है और गिफ्ट ,,,रोहन बोलता है बिटिया मैं सब पहले से ले आया है आप अपने ममा से मंग लो अदिति बोलती है जी मेरे प्यारे पापा।

सहसा रोहन की नजर मिना पर पड़ जाती है,रोहन बोलता है अरे मिना तुम अभी तक घर नहीं गई  आज तो छोटी दिवाली है,,,इतना सुनते ही मेमसाब बोलती है रोहन तुम ही इस मिना को सर पर बैठा के रखे हो तभी ये जब चाहती किसी न किसी बहाने से छुट्टी मारती रहती है । कभी छोटी दिवाली ,कभी होली,कभी दिवाली कभी ये काम कभी वो बस यही सब है,इन छोटो को ज्यादा मुँह लगाने का यही नतीजा होता है ,,,इतना सुनते ही मिना रो पड़ती है और बोलती है मेमसाब माफ़ कर दीजिये आज से छुट्टी नहीं मागूंगी और बोलती है मेमसाब अब तो जा सकती हूँ अब तो मेरे ड्यूटी का टाइम भी ख़त्म हो गया।मेमसाब कुछ बोल पाती इसके पहले रोहन बोल उठता है ठीक है मिना तुम जाओ।

मेमसाब,अदिति,रोहन तीनो मिलकर छोटी दिवाली मनाते है फटाके वैगरह जलाते करीबन रात के 10 बज गए रहे होंगे अदिति बेबी को खाना खिलाकर मेमसाब खुद अपने लिए और रोहन के लिए खाना निकालती हुए बोलती है ये मिना भी न एक काम ढंग से  नहीं करती,खान भी क्या बनाती है समझ नहीं आता। बोलो कुछ बनाती कुछ है…रोहन चुपचाप खाने खाने लगता है,खाना खाते-खाते मेमसाब बोलती है रोहन तुमने ही ये मिना को बिगाड़ रखा है  तुम कुछ बोलते ही नहीं उसे और इसी लिए वो मनमानी करती है।

खाना ख़त्म करने के बाद रोहन बोलता है देखो अंजलि जो भी हो मिना भी तो हमारे घर के  एक सदस्य के जैसी है वो हमारे बेबी का कितना ख्याल रखती है,तुम्हारा ड्यूटी जाने के बाद वो एक माँ के जैसे बेबी का ख्याल रखती है घर को संभालती है तुम्हारा बात कभी नहीं काटती, इतना सुनते ही मेमसाब आग बबूला हो जाती है और बोलती है बस रोहन बस तुम बस भी करो उस कामचोर मिना का favor   करना ।

रोहन बोल उठता है अंजलि तुमको  तो कुछ बोलना ही बेकार है,रात करीबन 12 बजे रोहन और अंजलि सोने चले जाते है सोते-सोते रोहन अंजलि से बोलता है अंजलि तुम बेवजह ही मिना को डाटते रहती हो तुम एक बार उससे प्यार से बात करो देखो वो तुम्हारा कितना सारा काम करेगी साथ ही उसकी नजर में तुम्हारी इज्जत और बढ़ जाएगी इतना कहकर रोहन सो जाता है।

रोहन की बात सुनकर अंजलि  कुछ सोचने लगती है,क्या मैं सच में मिना से गलत व्यवहार करती हो और ये सोचते-सोचते ..अंजलि भी सो जाती है।

सुबह 7 बजे डोर बेल आती है ,अंजलि आँख मलते-मलते दरवाजा खोलती है,सामने मिना खड़े रहती है मिना बोलती है नमस्ते मेमसाब अंजलि नमस्ते का जवाब देकर फिर बेड में चले जाती है ,मिना सीधा किचन में जाकर चाय बनाकर चाय का प्याला मेमसाब और साहब को देकर फिर किचन में अपने काम में मिना जुट जाती है,नाश्ता वैगरह रेडी करके मिना मेमसाब,रोहन,बेबी को टेबल पर बुलाती है।

नाश्ता ख़त्म करके मेमसाब रोहन को बोलती है रोहन आप घर पे रहना मै मार्केट से आ रही हूँ ,यह सुनकर रोहन बोलता है आज तो दिवाली है कहा जा रही होमैं भी आता हूँ , मेमसाब बोलती नहीं मुझे अकेले ही कुछ काम है यह कहकर मेमसाब चले जाती है।

करीबन 11 बजे डोर बेल बजता है रोहन दरवाजा खोलता है सामने अंजलि दोनों हाथो में दो बैग लिए हुए अंदर की तरफ बढ़ती है और मिना को आवाज लगाती है मिना-मिना ….मिना दौड़े-दौड़े आती है जी मेमसाब कुछ गलती हुई क्या फिर,ऐसा सुनते ही मेमसाब बोलती है नहीं।मिना कुछ गलती नहीं की तुमने गलती तो मैंने की है, तुम्हे बेवजह चिल्लाते रहती हूँ मुझे माफ़ करना मैं भूल गई थी अमीर या गरीब होना अलग चीज है उससे पहले हम इंसान है।

तुम हमारे बेबी का,घर का कितना ख्याल रखती हो जब तुम्हारे बच्चे बीमार होते है तो भी तुम हमारे बच्ची का ख्याल रखने पहुंच जाती हो इतना कहते कहते मेमसाब मिना को गले लगा लेती है, ये देखकर रोहन को समझ ही नहीं आता की हो क्या रहा है ये अंजलि में इतना परिवर्तन कैसा ?

मिना बोल उठती है नहीं मेमसाब ये  सब बोलकर आप मुझे शर्मिंदा मत करिए आप लोगो की वजह से मेरे गरीब का घर चलता है आप मेरे अन्नदाता है ये सुनकर मेमसाब की आँखे भर जाती और मेमसाब सोचने लगती मैं कितना गलत थी ये गरीब होने के बाद भी मेरे से कितना अमीर है मैं इसको इतना सुनाती हो तो भी इसके मन में मेरे लिए कितनी इज्जत है।

पीछे से रोहन माहौल को ठीक करने के लिए बोल उठता है अंजलि ये सब छोड़ो तुम ये बताओ की तुम  ये दो बड़े-बड़े बैग में क्या ले आई हो?मेमसाब बोलती है ,रोहन इसमें मिना और मिना के बच्चो और उसके पति के लिए दिवाली के लिए कुछ कपड़े,मिठाई और फटाके है ,,ये लो मिना और हाँ एक बात आज तुम जल्दी घर चले जाना आज दिवाली है घर में तुमको भी बहुत काम होगा,यह सुनते ही मिना मेमसाब के हाथो को पकड़कर बोलती है धन्यवाद मेमसाब ये सब की कोई जरुरत नहीं थी आपने प्यार से मेरे से मेरे बात कर लिया यही मेरे  लिए बहुत है।

     मेमसाब और रोहन को मिना धन्यवाद देते हुए अपना घर चली जाती है ,रोहन मेमसाब को बोलता है अंजलि आज तुमने बहुत अच्छा काम किया असल में दिवाली यही जो तुमने आज किया  अपने ऊपर तो हम लाखो खर्च करते है पर उसमे का कुछ हिस्सा  चाहे वो गिफ्ट हो या  दो मीठे बोल  अगर अपने से नीचे वालो के साथ बाँट ले तो खुशिया दोगुनी हो जाती है।मेमसाब बोल उठती है जी आपने बिलकुल ठीक कहा रोहन हमे अपने से नीचे वालो से अच्छा व्यवहार करना चाहिए क्या पता दो मीठे बोल उनकी सारी तकलीफ दूर कर दे।

       मित्रो इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है की इस दिवाली हम कुछ ऐसे करे की अपने से नीचे वालो को कुछ गिफ्ट दे हो सकता आपका छोटे से गिफ्ट से उनकी दिवाली वास्तव में दिवाली बन जाए और एक चीज की अपना व्यवहार उनके प्रति सकरात्मक रखे और अच्छा व्यवहार करे इसी के साथ Hinditechtalk की तरफ से दिवाली की ढेर सारी शुभकामनाएं

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Shashank Kuldeep Dwivedi

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