माचिस का अहंकार

माचिस का अहंकार

आज सुबह-सुबह की बात है थोड़ी ठंडी थी ,बाहर देखा तो कोहरा और पत्तियों में ओश की बुँदे थी सोचा अखबार पढ़ लू लेकिन ठण्ड इतनी थी पूछो मत मैंने चाय पिने का सोचा और झट से किचन में जाकर गैस का नॉब खोला और रेगुलेटर on किया पर lighter साथ नहीं दिया अब बारी आई माचिस की यहाँ-वहाँ देखने पर माचिस दिखाई दिया ।

 

माचिस की एक तीली उठाई और लगा गैस सुलगाने पर माचिस का तीली इतना जल्दी जल गया की मैं समझ नहीं पाया 2-3 तीली सुलगाने के बाद गैस जल गई जैसे तैसे चाय बनाया और फिर अखबार लेकर बालकनी में जाकर चाय पीते-पीते अखबार पढ़ने लगा।

 

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अखबार पढ़ते -पढ़ते मेरा जेहन में एक ख्याल आया की ये माचिस की तीली इतनी जल्दी जलता है,की पूछो मत और आखिरी में जलते समय माचिस की  तीली पुरे तरह से ऐंठ जाता है क्यों ?

माचिस का अहंकार

जब माचिस शुरू में जलता है तो उसको अहंकार रहता है की मैं हूँ सब कुछ ,मैं सारी दुनिया को जला सकता हूँ और बस इसी अहंकार में जल्दी-जल्दी जलने लगता है और जैसे-जैसे समय जाने लगता है ,माचिस की तीली को आभास होता है की ये क्या हुआ मैं खुद जल रहा हूँ बस यही हालत हम इंसानो की है ।

 

जब इंसान का  वक़्त सही होता है कुछ नजर नहीं आता है उसको सिर्फ एक ही चीज नजर आता है मैं और मैं और मेरा अहंकार,कभी आपने मैंने,सबने ये अनुभव किया होगा अगर हमने खुद अहंकार नहीं किया तो,किसी के अहंकार का भागीदार बने होंगे या सामना किये होंगे।

 

अपने Goals में Focus करिये।

 

अगर आपमें भी ऐसा ही कुछ अहंकार है तो  जरा रुकिए सोचिये अनुभव कीजिये कही आप भी उस माचिस की तीली के जैसे ही थोड़े है,जिसको शुरू में तो बहुत अहंकार होता है की मैं सब कुछ जलाकर नष्ट कर सकता हूँ पर अपने जलने के अंतिम समय में खुद को भी नहीं बचा पाता  है।

 

अहंकार एक ऐसा जानलेवा बिमारी है जो इंसान की अच्छाई को ख़त्म तो करती ही है  साथ ही उसको खुद को जलाने में कोई कसर भी नहीं छोड़ती संभलिए अपने आप से ये ऐसा मानसिक बिमारी है जो कही बाहर से आकर ग्रसित नहीं करता बल्कि अंदर ही अंदर खुद को दिमग की तरह खा जाता है।

 

यदि आप भी इस मानसिक बिमारी से ग्रसित है तो बचने का प्रयास करे और आपके आस पास कोई है तो उसे समझाए की ये एक माचिस के तीली जैसे अपने आपको ही न जलाये।

 

अहंकार करने से कुछ नहीं होता ,जाना हम सभी को वही उसी मिट्टी में कोई आगे तो कोई पीछे आपको भी किसी चीज का अहंकार है छोड़िये बड़ा हल्का महसूस करेंगे

 

अहंकार के ऊपर सं कबीर दास जी के दो लाइन

कबीर गर्व ना किजीये, काल गहे कर केश

ना जानो कित मारि है, क्या घर क्या परदेश।

कबीर कहते है कि घमंड मत करो। काल मृत्यु ने तुम्हारे बाल को पकड़ रखा है।

कोई नहीं जानता कि उसकी मृत्यु कहाॅं होगी अपने घर में या परदेश में। काल तुम्हें कहाॅं मारेगा।

पोस्ट पसंद आये तो like करे न करे शेयर जरूर करे आपके किसी अपने को अहंकार की लाइलाज बिमारी से मुक्ति मिलेगी और वो देख पाएंगे की इसके बिना भी दुनिया कितनी हसीन है।

 

आपका अपना मोटिवेशनल  मित्र

शशांक द्विवेदी

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