भविष्य निर्माण का मूल आदत है

आज हर माँ बाप अपने बच्चो को बहुत अच्छी सुविधा देना चाहते है सही भी है,लेकिन कभी आपने ये सोचा है की आपके बच्चे में कैसे आदते विकसित हो रही नहीं न तो सोचिए ,आदत ही आगे चलकर आपके बच्चे का  भविष्य तय करता है।

हमारे आस पास कही भी नजर घुमाकर देख लीजिए,कुछ परिवार ऐसे है जहाँ छोटो बच्चो को बहुत प्यार दिया जाता है, देना भी चाहिए बच्चे होते ही इतने प्यारे लेकिन कभी-कभी हम ज्यादा दुलार के चलते उनकी आदतों पर ध्यान देना भूल जाते है।

चलिए इसे एक छोटी सी कहानी के माध्यम से समझने का कोशिश करते है।

भविष्य निर्माण का मूल आदत है

 

एक शहर में एक टीचर रहती थी,जिनका भरा पूरा परिवार था उनके यहाँ कुछ एक्स्ट्रा मकान था,जिसे उन्होंने किराया पर दे रखा था इन मकानों में दो अलग अलग परिवार रहते थे दोनों परिवार  में पति-पत्नी और उनके छोटे-छोटे बच्चे थे। दोनों परिवार के बच्चे लगभग 4-5 साल के रहे होंगे।

एक परिवार का मुखिया और उनकी धर्मपत्नी  थोड़ा कड़क और गुस्सैल स्वाभाव के थे,जो अपने बच्ची की हर गतिविधि  पर ध्यान दिया करते  और अपने बच्ची को सच बोलने,चोरी न करने,बड़ो से आदर के साथ बात करने जैसे अच्छी आदतों को विकसित करने के लिए हमेशा जागरूक रहते थे। इस वजह से उनकी बच्ची को सब पसंद भी करते थे और उनके मकान की मालकिन,टीचर आंटी भी बच्ची को दुलार और अपनापन दिया करती थी।

ठीक इसके विपरीत दूसरा परिवार अपने बच्चे को प्यार तो बहुत देते और अपने बच्चे का हर ख्वाइस  भी पूरा करते,लेकिन बच्चे को कभी डाटते नहीं नहीं थे जिसकी वजह से उनका संतान 5 साल की उम्र में झूठ बोलना,बड़ो से सही तरीके से पेश नहीं आना ये सब बुरी आदते थी।

बात एक दिन की है,टीचर आंटी घर पर अकेली थी और किचन में खाना बना रही थी घर पर उनके अलावा कोई नहीं था खाने बनाने के बाद आंटी को किसी से बात करने की जरुरत पड़ी तो अपना मोबाइल ढूंढने लगी घर में,पर उनको अपना मोबाइल कही नहीं मिला।

वो परेशान होकर अपने किरायेदार (गुस्सैल स्वाभाव वाला परिवार) के यहाँ पहुंची और पूछी बेटा मेरा मोबाइल कही नहीं मिल रहा लगता है गुम हो गया।

एक बार मोबाइल पर कॉल लगा कर देखो तो कही मिल जाए,इतना सुनते ही किरायेदार ने कॉल लगाया अपने मोबाइल से और टीचर आंटी की मोबाइल की घंटी सुनाई देनी लगी ढूढ़ते-ढूंढते पता क्या चलता है की मोबाइल की घंटी दूसरे किरायेदार के मकान से आ रही है।

टीचर आंटी दूसरे किरायेदार के यहाँ जाकर पूछती है की मेरा मोबाइल आपके यहाँ कैसे आया तो दम्पति ने जवाब दिया वो क्या है आंटी हमारा बच्चा ले आया होगा भूल से,आंटी ने जवाब दिया ठीक है बुलाओ अपने बच्चो को पूछते है बच्चे को बुलाकर जब आंटी ने पूछा बेटा सच बताओ मोबाइल क्यों लाए थे,बच्चे ने जवाब दिया नहीं आंटी मैंने नहीं लाया वो इतने अच्छे से झूठ बोला की टीचर आंटी के होश उड़ गए।

टीचर आंटी ने उसके मम्मी पापा को बोला देखो बेटा एक बात बोलती हूँ आप लोग से,की अपने बच्चे में अच्छी आदते विकसित करे सच बोलने का,बड़ो से अच्छे से बात करने का,सम्मान करने का यदि बचपन में अच्छी आदते का विकास नहीं किया गया तो आगे चलकर उनका पूरा भविष्य खतरे में आ सकता है।

अपने Goals में Focus करिये।

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दंपत्ति ने जवाब दिया वो क्या है न आंटी अभी छोटा है बड़ा होते-होते सुधर जाएगा,दंप्पति ने बात को हलके में लेकर इग्नोर कर दिया। समय जाते गया दोनों किरायेदार कई सालो से उसी जगह पर थे अब दोनों परिवार के बच्चे 10 साल के हो चुके थे,गुस्सैल स्वभाव वाले परिवार  की बच्ची पढाई में बहुत होशियार थी और दूसरे परिवार का बच्चा पढाई में कमजोर और कई बुरी आदते लग  गई थे अब बचपन की चोरी उसका शौक बन चूका था।

इस छोटी सी कहानी के माध्यम से ये बताना चाहता हूँ की बचपन में बच्चो में जैसे आदते चाहे अच्छी आदते हो या बुरी उनका पूरा भविष्य तय करता है। आप भी ध्यान दीजिये अपने बच्चो पर और अपने आसपास के परिवार पर कही दूसरे परिवार के जैसे ज्यादा दुलार में कही अपने ही बच्चो का भविष्य अपने  हाथो से बर्बाद थोड़े ही कर रहे है।

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बच्चो के अच्छे भविष्य के लिए कुछ मूलभूत आदतों का विकास करना जरुरी है जैसे –

  • सदा सच बोलने का।
  • चोरी नहीं करने का।
  • अपने से बड़ो से शिष्टचार से बात करने का।
  • मितव्यता का।
  • अगर गलती हो तो गलती स्वीकार करने का।
  • समय पाबंदी का।
  • समय में सोने समय में जागने का,आदत विकसित करें।

 


“वैसे भी अब्दुल कलम साहब ने कहा है,

आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते,पर अपनी आदत तो बदल सकते है और बदली हुई आदते आपका भविष्य बदल देगी ।


 

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***Thanks for reading***

Shashank Kuldeep Dwivedi

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